हमारे धर्म में सभी देवी-देवताओं की एक निश्चित प्रकृति होती है। ब्रह्माजी सृष्टि निर्माण करते हैं, विष्णु सृष्टि के चालक हैं तो शिवजी प्रलय के देवता हैं। गणेशजी शुभ कार्यों में प्रथम पूजनीय ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ हैं तो लक्ष्मीजी धन की देवी हैं। सरस्वती ज्ञान का दान करतीं हैं तो भैरव अनिष्ट शक्तियों से रक्षा करते हैं। लेकिन जब हम राम भक्त हनुमान जी की बात करते हैं तब यह विषय रसप्रद हो जाता है। तुलसीदास जी ने हनुमान जी के लिए ‘ज्ञान गुण सागर’ ‘विद्यावान गुणी अति चातुर’ जैसे शब्दों के साथ साथ ‘सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा’ ‘भीम रूप धरि असुर संहारे’ जैसे विशेषणों का प्रयोग किया है।

यदि गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमानजी को इतने सारे गुणों का भंडार बताया है तो जिज्ञासावश प्रश्न यह उठता है कि उनके किस स्वरुप की पूजा-आराधना करनी चाहिए? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए चलिए चलते हैं कुछ प्राचीन मंदिरों की ओर… और ढूंढते हैं कुछ सिद्धहस्त कलाकारों के अप्रतिम चित्र!

आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले में चौथी शताब्दी में निर्मित उण्डावल्ली गुफ़ा में मारुति का शिल्प बारीकी से देखिए। मुख पर सौम्य भाव धारण किए मारुति की पुच्छ ज़मीन पर उनके पैरों के पास है। हनुमानजी की इस मुद्रा को ‘दास मारुति’ कहा गया है। जब हनुमानजी को भगवान श्री राम के साथ दिखाया जाता है तब उनका समस्त अस्तित्व राममय होता है और हनुमानजी का यह दास्य भाव हमारे मन मस्तिष्क में एक अनूठी भावमय चेतना का सँचार करता है।

andhra pradesh

इसके विपरित १५वीं शताब्दी में निर्मित विजयनगर-हम्पी के अवशेषों में प्राप्य कुछ प्रतिमाओं में हनुमानजी युद्धरत हैं और इन मूर्तियों में वीर भाव का प्रभुत्व ज्यादा प्रतीत होता है। जब हनुमानजी के चित्र या प्रतिमा में पुच्छ उपर की ओर उठी हो और दाहिना हाथ मस्तिष्क के करीब हो तब इन्हें ‘वीर मारुति’ कहा जाता है।

वीर मारुति और दास मारुति की प्रतिमाओं के अभ्यास का सबसे रसप्रद पहलू यह है कि वीर मारुति के चेहरे पर भी सौम्य भाव दर्शाए जाते हैं और वीरता के भाव स्पष्ट करने के लिए उनकी पुच्छ का सांकेतिक रूप से उपयोग किया जाता है। क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है?

प्रतिमा विज्ञान में शिव की संहारमूर्ति, वीरभद्र और महिषासुरमर्दिनी दुर्गा जैसे कुछ एक अपवादों को छोड़कर अन्य सभी देव प्रतिमाओं को सौम्य भाव में दिखाया जाता है। द्रोण पर्वत उठाए, लंका में रावण की सेना के साथ युद्धरत और लंका दहन करते मारुति की मूर्तियां ‘वीर मारुति’ की श्रेणी में आती हैं लेकिन इन प्रतिमाओं में भी हनुमानजी को चेहरे से सौम्य भाव का लोप नहीं होता। भूत-बाधा, विपत्ति या महत्वपूर्ण परीक्षा के समय और जीवन में साहसिक निर्णय लेते समय वीर मारुति की आराधना करते है। महाराष्ट्र के समर्थ स्वामी रामदास जी ने पराधीनता की मानसिकता से ग्रस्त युवाओं को राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए जागृत करने हेतु अनेक गाँवों में वीर मारुति के मंदिरों की स्थापना की थी।

मुंबई में कुछ समय पूर्व ध्यान साधना का अभ्यास कर रहे ३६ युवकों पर एक सर्वे किया गया जिसमें अधिकांश साधकों ने दास मारुति का चित्र ध्यान प्राणायाम के अभ्यास के लिए ज्यादा उपयुक्त पाया। घर के पूजास्थल में दास मारुति का चित्र या शिल्प रखने से एकाग्रता, धैर्य और बुद्धि का विकास होता है।

Maruti

लेखक: तृषार

गंतव्यों के बारे में नहीं सोचता, चलता जाता हूँ.

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Ashish Soni
1 year ago

बहुत खूब भाई।

Shivam sharma
Reply to  तृषार
1 year ago

“सिया राम मय सब जग जानी ”
राम जी के रस में रंगे हनुमान जी का सुंदर चित्रण मन मोह लिया. आगे भी पढ़ना चाहूंगा.जल्द नया लेख उपहार में दीजिए…
आपके नये प्रयोग के लिए शुभकामनाएँ.

Shrimaan
Shrimaan
1 year ago

बहुत बधाई तृषार,
ईश्वर से प्रार्थना है कि सदैव प्रगति के पथ पर अग्रसर रहो।

गोपेश तिवारी
गोपेश तिवारी
1 year ago

बहुत सुंदर। जय वीर हनुमान। लेखक को हृदय से आभार।

Siddhi
Siddhi
1 year ago

अद्भुत लेखन!बहुत लाभप्रद जानकारी।

सूर्यांश
सूर्यांश
1 year ago

बहुत सुंदर तृषार भैया। बेहद आनन्ददायी लेखन। लिखते रहें, हमारा ज्ञानवर्धन करते रहें।

राधा अग्रवाल
राधा अग्रवाल
1 year ago

इतनी जानकारी को इकट्ठा कर हम लोगों तक पहुँचाना

सात्विक
सात्विक
1 year ago

अपनी लेखनी तो हम लोगों को ऐसे ही जीवन भर प्रकाशित करते रहें।

रामकुमार
रामकुमार
Reply to  सात्विक
1 year ago

समय और माध्यम बदलने पर देश और धर्म की जो सेवा कभी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस को संस्कृत से हिंदी लिखकर की थी और आधुनिक युग मे गुलशन कुमार जी ने ऑडियो वीडियो के माध्यम से की अब नये रूप मे आप कर रहे है इसको कभी छोटा और कम ना समझे और कभी रुकने मत देना मेरी यही आप से प्राथना है
क्युकि नई पीढ़ी तक आप जो उनके हाथो मे सारे ग्रंथो का निचोड़ पहुंचा रहे है जिसको शायद ही वो कभी ढूंढ पाए
इसके लिए बहुत बहुत आभार

Nirmal Saxena
Nirmal Saxena
1 year ago

Wah

ओंकार
ओंकार
1 year ago

बहोत ही बढ़िया सर जी

द्वारिका नाथ पांडेय
द्वारिका नाथ पांडेय
1 year ago

इतना ज्ञानप्रद लेख वो भी इतने इतने सरल, सटीक वाक्यों में ये सब गुरु के आशीर्वाद से
ही संभव है और ये आपके गुरुदेव का ही आशीर्वाद रहा होगा कि भारत परिक्रमा की ये यात्रा आज गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुरू हुई है।
ज्ञानप्रद जानकारियों के लिए आपको आभार और प्रणाम कृष्ण❣️

द्वारिका नाथ पांडेय
द्वारिका नाथ पांडेय
1 year ago

इतना ज्ञानप्रद लेख वो भी इतने इतने सरल, सटीक वाक्यों में भईया ये सब गुरु के आशीर्वाद से ही संभव है और ये आपके गुरुदेव का ही आशीर्वाद रहा होगा कि भारत परिक्रमा की ये यात्रा आज गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुरू हुई है। आपका आभार व प्रणाम भईया❣️

Fictionhindi
Fictionhindi
1 year ago

परम आनंद की अनुभूतियुक्त लेखन । मारुति के कृपाप्रसाद से आपका यह उपक्रम भी सिंधु पार की छलाँग लगाये ,यही कामना है।

Pratibha
Pratibha
1 year ago

बहुत सुंदर आलेख! नई जानकारी दी आपने। प्रभु आप पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें

Pradeep Rajput
Pradeep Rajput
1 year ago

गुरु पूर्णिमा के दिन इससे अच्छा ज्ञान और कहाँ ही प्राप्त हो सकता था, प्रणाम स्वीकार करें तुषार भैया।

Balendu Sharma
Balendu Sharma
1 year ago

अद्भुत, जितना आनंद आपको लिखने में आया होगा उतना ही आनंद हमें पढ़ने में आया, इस लेख और आगे के सभी लेखों के लिए आभार सहित शुभकामनाएं।

सुनील
सुनील
1 year ago

गुरु पूर्णिमा के दिन हमारा ज्ञानवर्धन हुआ आपको पढ़कर। बहुत बहुत धन्यवाद

सुरभि
सुरभि
1 year ago

बहुत सुंदर , शुभकामनाएं

साधो
साधो
4 months ago

श्री हनुमान जी के दास एवं वीर दोनों की रूप का अत्यंत सहज व सरल रूप में वर्णन किया है। सुन्दर तृषार। स्नेहाशीष।

sapna
sapna
4 months ago

Ati sundar …

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